Tuesday, July 6, 2010

आओ ट्विस्ट करें- पंचम दा की विस्फ़ोटक धुनों पर....श्रद्धांजली

RDX of Rahul Dev Burman


आज तो बस मैने ठान ही ली है, कि आज एक पोस्ट ज़रूर हो जाये.

दर असल इतने दिनों में व्यस्तता का तो आलम था ही, मगर लेपटॊप खराब हो जाना, फ़िर इजिप्ट के दो तीन चक्कर और काम की अधिकता, बस ब्लोग से दूर ही रहा.

वैसे बात ये भी है कि मैं कोई लेखक तो हूं नहीं, जो स्वयंस्फ़ूर्त ही कुछ लिख दूं. दिल में जो मेहसूस करता हूं वही कलम पर या कीबोर्ड पर उतर जाता है, और दिलीप के दिल से पोस्ट का सृजन हो जाता है.

मगर इस बार दिल तो किवाडों के अंदर ही बंद रहा , और दिमाग के खेल चलते रहे. मसलन इजिप्ट में कंपनी खोलना, प्रोजेक्ट का श्रीगणेश करना आदि आदि.

तो आज सोचा कि आज तो बस लिख ही दें, जो भी मन में आता है.

दर असल इन दिनों फ़िल्मी संगीत से जुडी कई हस्तियां याद आई , उनके जन्म दिन या पुण्यतिथी पर.

तलत साहब याद आये, उनके इन्दौर में हुए कार्यक्रम की एंकरिंग की थी तो उनसे हुई अंतरंगता, राज कपूर साहब से निजी मुलाकातें, फ़िल्म बॊबी के लिये दिये गये गाने की अनौपचारिक ऒडिशन, राहुल देव बर्मन से होटल ताजमहल के क्रिस्टल हॊल में फ़िल्म अपना देश के प्रीमीयर पार्टी पर राजेश खन्ना के साथ की गयी उनकी मस्ती... ,बचपन की इन यादों ने दिल पर दस्तक दी, और परदेश में मन को दिले सुकून दे गयी ये यादें.


राहुल देव बर्मन तो बडे ही अफ़लातून संगीतकार थे.मेहमूद नें सही ही फ़रमाया था. वे उन दिनों ही इतना फ़्युचरिस्टिक संगीत का, धुनों का सृजन करते थे .वे हमेशा नई नई परकशन्स वाद्यों पर, स्वरों के विभिन्न आयामों पर यूं प्रयोग किया करते थे कि मेहमूद ने आज से चालीस साल पहले कहा था, कि शायद पंचम नाम का तारा बॊलीवूड के संगीत के आकाश में ज़रा जल्दी ही उग गया है. ज़रा दस बीस साल ठहर जाओ, वह धूमकेतु की तरह आकाश पे छा जायेगा.

उनका कहना सच ही हुआ, उन्ही दिनों में वह सुरों के आकाश पे छा गया था, अपनी निराली मगर मधुर धुनों से. मगर आज चालीस साल बाद ज़रा गौर करें , कि पिछले दस पंद्रह सालों में जितने भी रिमिक्स बनें है, उनमें अधिकाष पंचम दा की धुनों पर ही हैं.Is not it?

उनकी प्रयोगधर्मिता के तो हमें कायल होना ही पडेगा.गाने के अंदर ही स्केल चेंज का फ़ंडा पहली बार आपने ही दिया. अलग अलग तरह के ताल वाद्य और ठेके उन्होने गानों में उपयोग किये, जैसे कि मादल इत्यादि. अभी पिछली बार के दुबई टूर में मैंने एक साईड रिथम का अरेबीयन वाद्य खरीदा था, जो मारकस और रेसो रेसो का ही युगल स्वरूप था, जो अरेबियन संगीत के तालवाद्यों में से एक है. यू ट्युब पर राहुलदेव की एक पुरानी रिकोर्डिन्ग के विडियो में वह वाद्य प्रयोग किया गया दिखा!!

मगर काश वे आज जिंदा होते, तो क्या आज की पीढी के संगीतकारों से कहीं उन्नीस बैठते? शायद हां... क्योंकि वे शायद मेलोडी के साथ कंप्रोमाईज़ नहीं कर पाते,जो अधिकतर नये संगीतकार कर रहें हैं. यूं नही कि आज की पीढी के ये सृजनकार गुणी या टेलेंटेड नहीं है, मगर समय की कमी, नयी पीढी की अल्प स्मृति या रिदमिक ताल की तात्कालिक श्रवणीयता के बहाने जो भी परोसा जा रहा है, वह मेलोडी तो नही है.( अपवादों को छोडकर)

चलो , आपको उन्ही का एक गीत सुनवातें हैं, जो सन १९६५ के आसपास रचा गया था, मेहमूद के ही फ़िल्म भूत बंगला के लिये, जिसमें पंचम दा का भी कॊमिक रोल था.


गीत है आओ ट्विस्ट करें, क्या खुला मौसम....


इस गीत को मना दा नें क्या खूबसूरत गाया है. क्या एनर्जी और सुरों का पावरयोगा है ये गीत!!! आपको बता दूं, फ़िल्म में इस गानें से एकदम पहले अमीन सायनी साहब नें तनुजा का गीत पेश किया था , (लताजी की मधुर आवाज़ में) जो मेलोडी, माधुर्य से भरे भारतीय संगीत शैली का था, और उसके एकदम बाद यह पाश्चात्य शैली का ट्विस्ट सोंग, बिल्कुल विपरीत जोनर का... ये सिर्फ़ पंचम दा ही कर सकते थे.


ये गाना मन्ना दा को समर्पित कार्यक्रम दिल का हाल सुने दिल वाला .. से लिया गया है, और इस गाने को मैने भी फ़िल्म उपकार के धीर गंभीर गीत कसमें वाद प्यार वफ़ा के एकदम बाद गाया था, और कोशिश की कि उसमें में से कुछ उर्जा, कुछ पावर को मैं भी अपने गले में डाल सकूं. (मन्नादा से उदयपुर में शो के दौरान निजी मुलाकात में मैने पूछा था कि आप तो क्लासिकल आधारित गानों के लिये जाने जाते हैं,मगर फ़ास्ट गानों में आपको कौनसा गीत पसंद है? तो उन्होने कहा कि ये गीत उनके दिल के करीब है.कुछ लडके और लडकीयां जो वहां मौजूद थी वे दंग रह गये जब बाद में मन्नादा नें
उतनी ही जोश, तडक भडक और नफ़ासत के साथ यह फ़ास्ट गीत गाया.)मैं भी ज़रा ज़्यादा ही झूम लिया था इस गाने में.....!!!!!!

संजय भाई नें सही कहा है अपने एंकरींग में, इस गाने की पृष्ठभूमी बनाते हुए, कि आजकल हमें नये फ़्युज़न के नाम पर जो भी सुनाया जा रहा है, यही काम पंचम दा नें बरसों पहले किया और मधुरता को बरकरार रखते हुए!!! और चाहे कुछ भी हो जाये, पुराना संगीत कभी भी भुलाया नहीं जा सकेगा.आप उनके बात से सेहमत ज़रूर होंगे.

8 comments:

Mayur Malhar said...

इस गाने में तो जादू है. पंचम डा का जवाब नहीं.

अल्पना वर्मा said...

*मिस्र के प्रजेक्ट के लिए शुभकामनाएं.
*बहुत दिनों बाद आयी यह पोस्ट आप की व्यस्तता बता रही है.
आप का लेपटोप खराब था और सुना है आप के इंदौर शहर का नेट भी गड़बड़ है.
*संजय जी की एंकरिंग का जवाब नहीं,इस गाने के लिए बहुत अच्छी भूमिका कही है.
*आप ने यह गीत बिलकुल मूल गीत जैसा गाया है.आप की गायकी बेहद उम्दा है.
जोश भरे इस गीत को सुनकर यक़ीनन सभी झूम उठे होंगे.
*पंचम दा के प्रवेश ने संगीत जगत में क्रांति ला दी थी.बहुत ही कामयाब संगीत दिया था उन्होंने.
[आप के लिए कुछ और बेहद अच्छे कमेन्ट गीत-'दिल की नज़र' के लिए आये हैं ..आप को फॉरवर्ड करूंगी.
एक साईट पर आप का गाया 'कश्ती का खामोश सफ़र' कई हफ्ते featured song रहा.आभार आप ने मुझे उस गीत का हिस्सा बनाया.

निर्मला कपिला said...

खूबसूरत प्रस्तुती आभार।

डॉ .अनुराग said...

इत्तिफ़ाक़न कल मन्ना डे का ही एक गाना सुना था.फिल्म गृह प्रवेश का....टाइटल सोंग .

दिलीप कवठेकर said...

अल्पना जी,

* दिल की नज़र से....

उस गीत को आपने ही दिशा दी है, और उसकी सफ़लता के पीछे हम दोनों का मिला जुला प्रयास ही तो है.

संजय भाई की निवेदन शैली में प्रामाणिकता है,लफ़्फ़ाज़ी बिल्कुल नहीं. और वे श्रोता के साथ संवाद यूं स्थापित करते हैं कि हर कोई उस गाने के एम्बियेंस में पहुंच जाता है. यही तो खूबी है किसी भी एंकर की.

धन्यवाद.

दिलीप कवठेकर said...

अल्पना जी,

* दिल की नज़र से....

उस गीत को आपने ही दिशा दी है, और उसकी सफ़लता के पीछे हम दोनों का मिला जुला प्रयास ही तो है.

संजय भाई की निवेदन शैली में प्रामाणिकता है,लफ़्फ़ाज़ी बिल्कुल नहीं. और वे श्रोता के साथ संवाद यूं स्थापित करते हैं कि हर कोई उस गाने के एम्बियेंस में पहुंच जाता है. यही तो खूबी है किसी भी एंकर की.

धन्यवाद.

Manish Kumar said...

twist ho gaye hum to

हरकीरत ' हीर' said...

मैने भी फ़िल्म उपकार के धीर गंभीर गीत कसमें वाद प्यार वफ़ा के एकदम बाद गाया था, और कोशिश की कि उसमें में से कुछ उर्जा, कुछ पावर को मैं भी अपने गले में डाल सकूं. (मन्नादा से उदयपुर में शो के दौरान निजी मुलाकात में मैने पूछा था कि आप तो क्लासिकल आधारित गानों के लिये जाने जाते हैं,मगर फ़ास्ट गानों में आपको कौनसा गीत पसंद है? तो उन्होने कहा कि ये गीत उनके दिल के करीब है.कुछ लडके और लडकीयां जो वहां मौजूद थी वे दंग रह गये जब बाद में मन्नादा नें
उतनी ही जोश, तडक भडक और नफ़ासत के साथ यह फ़ास्ट गीत गाया.)मैं भी ज़रा ज़्यादा ही झूम लिया था इस गाने में.....!!!!!!

इस पोस्ट से आपके बारे में कुछ और जानकारियाँ मिली .....इतनी बड़ी हस्तियों के साथ काम कर चुके हैं आप .....मेरा तो सौभाग्य है जो आपका स्वर मेरी नज्मों को मिला .....''.चाँद फिर निकला ''....उसे फिर किसी दिन पोस्ट पे लगाउंगी .....
इस बीच बहुत बार ख्याल आया ....आज अनुराग जी के ब्लॉग से होती हुई यहाँ पहुंची .......आप तो इजिप्ट में कंपनी तक खोल आये .....कैसी....इस पर भी खुलासा करते ......

कामेडी गानों की इतनी शौकीन नहीं हूँ .....फिर भी आपकी गायकी का जवाब नहीं ......!!

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