Monday, October 13, 2008

जिंदादिल और संजीदा कलाकार - किशोर कुमार

कड़ी - १

आज दिल बहुत उदास है.

ज़ाहिर है. आज 13 अक्टूबर को किशोर दा की पुण्यतिथि है, बींसवीं.


आज सुबह से ही एक बेकसी सी छाई रही. पहले जब भी कभी उदासी का आलम होता था तो किशोर दा के नगमों के साए तले आसन जमा कर बैठ जाते थे, उनके हर मूड के गीतों को सुन कर , कभी गुनगुना कर दिल का बोझ कुछ तो हलका कर लिया करते थे. मगर आज क्या करें ?

आज दिन भर वो मेरे करीब , आसपास रहे, उनका अहसास मन में और गहरा उतरता चला गया . यादों के रोलरकोस्टर पर मेरा मन बैठ उनके गानों के विश्व में , सुरों के चढाव और उतार में खो गया. कभी सुन कर, कभी गुनगुना कर किशोर दा के गीतों के महासागर में डूब गया.

किशोर दा के जिंदादिल व्यक्तित्व की बड़ी चर्चाएँ है. मगर कोई यह पूछे की वे पहले एक अच्छे गायक थे,या संगीतकार ,या
अभिनेता, या निर्देशक - तो यह भी अजीब सा सवाल हुआ. इस हरफन मौला कलाकार नें एक अवलिया संत की तरह किसी बंधन को नही स्वीकारा. फ्री स्टाईल कुश्ती के पहलवान की तरह अपने फक्कड़ अंदाज़ में वे हर आखाड़े में कूद पड़े! फ़िल्म संगीत की हर विधा में अपने सृजन की क्षुधा को शांत कराने में लगे रहे.

His genious was menifested in his genre of Inovative, Distinctive & passionate creativity ,parallel to none. His responce to Music was Sponteneous & Intuitive,yet intrepid enough to mesmerise us. His golden voice had all shades of human traits & emotional chords, echoed with pathos & malancholy.

Although, he was not a trained Singer, (He need not be ) he had an unique approach to singing - Kishorian approach!!,unlike his contempory equally genious peers, who had a perfetionist and traditional approach to rendering of songs.

A Natural player like Sachin or Lara, he could apply all his skills with his masterly strokes,at his free will, to all kind/genre of musical notes ,difficult or simple to execute.Kishor Kumar could make a song look so deceptively simple with his Sonorous Richness of Voice.

एक अच्छे गायक की पहचान के लिए, उसके गले के घुमाव, मींड , और अहसासात को , संवेदनाओं , भावनाओं को स्वरों के माध्यम से अभिव्यक्त कराने के उसके कमाल को जानने, समझने के लिए किसी भी सुधी श्रोता को स्वयं गायक होना ज़रूरी नहीं. इसीलिये किशोर दा आम जनता की पसंद के गायक बनें.

किशोर कुमार के गले में जो खनक थी, उसके साथ गज़ब की कॉमेडी की टाईमिंग , अभिनय का अनूठा संयोग था जिसका उपयोग वे गीत में जीवंतता लाने के लिए करते थे. खासकर वे कॉमेडी गीत जिसमें संभाषण या बातचीत के सादे ढंग का उपयोग किया गया हो. कुछ इसी तरह का अनूठा गुण आशा भोंसले की आवाज़ में भी था, जिसकी वजह से उनके दोगानें भी बड़े मक़बूल हुए. (आंखों में क्या जी, हाल कैसा है जनाब का, आप यहाँ आए किस लिए, आदि)

उनकी यह जीवंतता , उनकी ये जिंदादिली , खिलन्दडपन के बावजूद वे एक संजीदा इंसान थे. मन के भीतर कहीँ गहरे में चुभ रहा वह अकेलापन , उनके दर्द भरे गीतों में उभर आता था .

एक टीस सा एहसास हमेशा के लिए अपने जिगर पर लेकर वे हमसे रुखसत हो गए.


कहीं ज़िक्र हुआ था किशोर दा से उनके सबसे ज़्यादा दिल के करीब पसंदीदा गानों के बारे में , तो उन्होंने जिन गीतों का चयन किया था वे सभी के सभी दर्द भरे गीत थे.

उनकी लिस्ट यहाँ दी जा रही है : ( Not in Order)

१. दुखी मन मेरे - सचिन देव बर्मन - फंटूश
२. जग मग जग मग करता निकला - खेमचंद्र प्रकाश - रिमझिम
३. हुस्न भी है उदास उदास - अनिल विश्वास - फ़रेब
४. चिंगारी कोई भड़के - राहुल देव बर्मन - अमर प्रेम
५. मेरे नैना सावन भादों - राहुल देव बर्मन - महबूबा
६. कोई हमदम ना रहा - किशोर कुमार - झुमरू
७. मेरे महबूब क़यामत होगी - लक्ष्मीकांत प्यारेलाल - मि. एक्स इन बोम्बे
८. कोई होता जिसको अपना - सलिल चौधरी - मेरे अपने
९. वो शाम कुछ अजीब थी - हेमंत कुमार - खामोशी
१०. बड़ी सूनी सूनी है - सचिन देव बर्मन - मिली

अभी जो गीत मैं यहाँ सुनवा रहूँ , ये मुझे बड़ा पसंद है ,

आ चल के तुझे , मैं ले के चलूँ , एक ऐसे गगन के तले,
जहाँ गम भी ना हो , आँसू भी ना हो, बस प्यार ही प्यार पले..

एक ऐसा ही जहाँ चाहते थे किशोरकुमार ...



किसी भी गायक की असली पहचान होती है ऐसे गाने से जिसमें सुरों का साथ बहुत कम लिया गया हो.
जिन रातों की भोर नहीं,
आज ऐसी ही रात आयी..

(कितना मौजूं है ये आज की रात ..........)


कल फ़िर लेकर आऊँगा एक अनूठे कार्यक्रम की रिपोर्ट लेकर, जो कल ही किशोर जी की स्मृति में आयोजित किया गया था, जिसमें जाने माने ग्रामोफ़ोन रेकॉर्ड संकलनकर्ता श्री सुमन चौरसिया नें हमें किशोर कुमार के वे नायाब और दुर्लभ गीत सुनवाए की हम जैसे श्रोताओं के स्मृति पटल से वे अब तक मिट नही पा रहे है.

4 comments:

निशांत मिश्र said...

प्रिय दिलीप भाई, एक शानदार पोस्ट और ब्लॉग के लिए शुक्रिया. मैं आपकी लेखनी और selection का कायल हूँ. कृपया किशोर दा की फ़िल्म ''दूर का राही'' के गाने कहीं से ढूंढ निकालें, विडियो हो तो और अच्छा. आप मेरे ब्लॉग chitrageet.blogspot.com पर आए और कमेन्ट दिया, उसके लिए धन्यवाद. मैं अपने ब्लॉग पर सिर्फ़ गाने जोड़ने में ही व्यस्त हूँ. आप बहुत कम पोस्टें करते हैं, ज़रा स्पीड बढाइये.

Harshad Jangla said...

श्री दिलीपभाई
अति रसदायक लेख लेके आते है आप | आप की महेनत की तो दाद देनी पड़ेगी |
बहुत बहुत धन्यवाद |
-हर्षद जांगला
एटलांटा , युएसए

हरि said...

पता ही नहीं चला कि एक घंटा कैसे बीत गया आपके ब्‍लाग पर किशोर दा के साथ। आभार।

Anil Pendse अनिल पेंडसे said...

स्वर्गीय किशोर कुमार (मेरे दिल में तो अभी भी जीवित ) पर जानकारी के लिए धन्यवाद्!

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