Monday, November 3, 2008

पिया तोसे नैना लागे रे...- सचिन देव बर्मन

कड़ी - २
सचिन देव बर्मन पर दूसरी कड़ी लेकर हाज़िर हूँ.

सुनकारों से आग्रह है, की अगर उन्होंने सचिन दा पर पहली कड़ी नही भेंट की हो तो कर लेंगे ,तो इस कड़ी का सन्दर्भ समझाने में ज़रा आसानी होगी.

हम बर्मन दा के पिटारे में से कई नायाब जवाहिरात चुनते है, तो इस गानें को अग्रिम पंक्ति में पाते है.

पिया तोसे नैना लागे रे...

गाईड फ़िल्म के ४ स्टॆन्झा और ८ मिनीट के इस मेरथॊन गीत को सचिन दा बिना किसी प्रील्युड से शुरु करते है(जैसा कि वे कई बार कर चुकें हैं), और स्थाई के बाद Rich Orchestra के Interludes गीत को अपनी मीठी गिरफ़्त में ले लेते हैं. साथ ही साथ शैलेन्द्र के अतिआकर्षक बोलों की जुगलबंदी सी चलती है ताल के साथ, जो धिनक धिन धिन धिनक धिन धिन पर थमती है.

The orchestral interludes in this song are rich and varied. Though these music pieces are tailor-made for a dance choreography, unlike most dance pieces they do not remain limited to a frenzy of ghungroos, tabla and sarangi/harmonium. The orchestral interludes, here, in typical SD Burman style, are uncluttered and spontaneous. However they still use a wide variety of instruments and are richly layered. Violins, Sitars, ghungroos, tabla, drums (note the lovely use of a north eastern drum in the portion before भोर की बेला सुहानी) and the flute all fit into the overall composition like pieces in a jigsaw puzzle. Strings, as with most of Dada’s songs, are used with great felicity. Note the extremely catchy short string pieces strewn all over the song. विशेषतयाः उस जगह जहां गाना मुखडे़ पर लौटता है ...

ताल में भी हमें कहीं कहीं भटियाली शैली के दर्शन होते हैं.कहीं कहीं तबला बॆक सीट ले पृष्ठ्भूमि में चला जाता है और ड्रम पर्कशन वाद्य समूह प्रभावी हो जाते है.

मगर मेरे मित्रों , ये सब बेमानी हो जाता है जब तक हम यह भी नही कबूल कर लेते कि विजय आनंद के निर्देशन में इतने अच्छे फ़िल्मांकन और वहीदा जी की बेमिसाल नृत्य अदायगी नें सचिन दा की मेहनत में चार चांद लगा दिये है.(Waheeda is Elegence & Grace Personified, indeed !!!)

फ़िल्म में इस गीत की कहानी का केंद्रबिंदु है राजू गाईड और रोज़ी के बीच पनपते रिश्तों का -नैना लागे रे!!
फ़िर समय के बीतने के संकेत होली और दिवाली के त्यौहारके पृष्ठभूमि में इन संबंधों में प्रगाढ़ता और व्यावसायिक कार्यक्रम की क्रमवार सफलता का बेहद प्रभावी चित्रण है. बड़ी शालीनता के साथ उनके बीच स्थापित होते शारीरिक और प्रेम सम्बन्ध भी खुलते हुए दिखाते है, और गीत के बोल भी ये सूचित करते है.चमकाना उस रात को जब मिलेंगे तन मन, मिलेंगे तन मन...

ज़रा पूरे गानों के बोलों पे भी बारीकी से गौर फरमाएं जनाब. और साथ ही में अनुभव करें कि
हर अंतरे में विभिन्न रंगों के और समय के रागों का मिश्रण खूबसूरती से गढा गया है.

इसीलिये ही कहा गया है, की संगीत यह स्वार्गिक सुखों के अनुभव की चीज़ है, तार्किक बुद्धिमत्ता की नहीं.

अब देखिये, गाईड फ़िल्म का वह गीत विडियो पर, और गोते लगाईये मधुर संगीत की फुआरों से सजे झरने में.

तीसरी कड़ी अगले हफ्ते ..

17 comments:

kadva said...

great to see pandit joshi's photo on your blog.what a great mental presence you have.NO other populer blogger could do so. in present scenario you are the only writer with great musical depth . you should be a full time musician and singer.are you a music critic?

दिलीप कवठेकर said...

Thanks indeed. I am indebted with your showers.

No sir, I am not a Music Critic, but an Structural Engineer-Architect, with an occasional romance with Music Critics,singing & writing. I am an Amatuer Musician and singer, and take music as passion to the extent of Spirituality.I have just started indulging into writing after a span of 15-20 years, and my expressions are not from the literary wisdom, but from depth of my दिल.

Your words inspires an artist in me, to serve music lovers like you
in a better way, and hence we share our सात्विक sensetivity and Love for Music and humanity.

अपने दिल में रहता हूं,
मैं भी तेरे जैसा हूं...
मैं भी तेरे जैसा हूं.......

Aarohi said...

आपने फ़िर एक और अच्छे पोस्त से हमारा मन जीत लिया है. आप लिखते रहेन्गे तो हमेन भी प्रेरणा मिलेगी कि हम भी कोशिश कर कुछ लिखे.

तीसरी कडी का इन्तेजार रहेगा.मन्ना डे पर दिल का हाल सुने दिल वाला को शुरु से क्यो नही दिखाते? हर गीत को . वह प्रोग्राम दूसरे ओर्केस्ट्रा जैसा नहीन होकर शालीनता से भरा था.

priyanka said...

I am here for the first time, and i liked it.

When are you giving third part (sequel) of this?

Where can I see other songs of this program of Manna Dey?

Mrs. Asha Joglekar said...

सचिन दा मेरे भी प्रिय संगीत कार है । थे नही कहूंगी क्यूंकि आज भी हैं । पिया तोसे नैना लागे रे तो एक पसंदीदा गीत। इसको सुनवाने का शुक्रिया

अल्पना वर्मा said...

Dilip ji,

bahut hi sundar geet laye hain aap--

[shayad is geet mein 5 satnzas hain-jahan tak mujhey yaad aa raha hai--sirf 4 hi picture mein picturise kiye gaye hain--

main yaad akrti hun ki kahan wo saare stanzas maine suney ya padhey they--phir batati hun--]

bahut achcha vishleshan kiya hai aapne--

aap ki likhi yah baat-
संगीत यह स्वार्गिक सुखों के अनुभव की चीज़ है, तार्किक बुद्धिमत्ता की नहीं.
bahut achchee lagi--

दिलीप कवठेकर said...
This comment has been removed by the author.
दिलीप कवठेकर said...
This comment has been removed by the author.
आत्ममुग्ध said...

कडवा जी नें बडा ही योग्य और मीठा कमेंट दिया है, मैं सहमत हूं.एक फ़ुल टाईम संगीत सन्गीतग्य ही इतने गहरे विश्लेशण में जा सकता है.

दिलीप जी के पीछले पोस्ट पर भी जा कर देख सुन आया. वे संगीत का और लेखन का आनंद लेते है.

सही कहा है, कि
संगीत यह स्वार्गिक सुखों के अनुभव की चीज़ है, तार्किक बुद्धिमत्ता की नहीं.

चतुर सुजान और दीगर समझ्दार लोग ,संगीत की इस बिरादरी में यहां अपने स्वत्व को घर पर रख कर पधारें तो और आनंद पायेंगे ये दावा.

Mahendra said...

Dilipji, I appreciate your efforts for such a beautiful blogging. How you are able to get time out from your busy schedule. Why dont you try to enter BIG BOSS house ?

सजीव सारथी said...

what a song it is, infact this whole movie is an wonderful experience thanks

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

i liked your post on this song - you are a true sangeet bhakt which is reflected in your detqiled writings.

kunal said...

दीलीप साहब
क्या कहने आप के.
गजब कर दिया आपने.
सचीण दादा मेरी नज्रों मे
एक एसे अपलातूण मुजीक डारेक्ट्रर थे जो
किलासीकल के साथ गावखेडे का संगीत बनाते थे.
आपने क्या तो गीतकार,गायीका(हालाकी लता के बारे में कल लीखा हे आपने)नाच,बाजे के बारे मे जो मेटर लीखा हे वो तो कीसी न्यूजेपेप्रर मेंछपने जेसा हे.एक तरह की रीसर्च कर दी आपने.भई कमाल हे.आपको तो क्ल्लासीकल की गजब की समझ हे.आपकी पीछली पोस्टे भी पड़ी ..मजा आ ग्या.मेरे मेल आई डी पर आपकी पोश्टो की जानकारी देते रेना.
आपसे ऊमीद हे की आप नोशादमिया,रोसन,जेदेव,पचंम,ओर मदन्जी पर भी लीखोगे.लगता हे आपकी संगीतकारो पर खासी पकड हे.हिन्दी या इंगलीस में एक कीताब की ऐसी दरकार हे कि जिसमे सारे संगितकारो के बारे में और उन्के गीतो की खासीयत के बारे मेंजानकारी मिल जाए.
आप कहा रहते हे और क्या करते हे जानकर प्रसनाता होगी.
kunalsavita@gmail.com

ताऊ रामपुरिया said...

भाई कवठेकर जी , आपकी पोस्ट पढ़कर और आपके संगीत प्रेम और उसकी समझ से बहुत अभीभूत हूँ ! आपको बहुत शुभकामनाएं ! कभी जरुर मुलाक़ात होगी !

डॉ .अनुराग said...

शायद गीतों ने इस कहानी को जीवंत किया था ....जो आज तक साँस लेती महसूस होती है

pradeep dubey said...

AGAR AAP STAGE SHOW KARTE HAI TO KABHI STAGE CONDUCT KARNE MUJHE BULAIYE,AAP SE MILNE KEE ICHA HAI

pRADEEP
09425020970
RAIPUR

pradeep dubey said...

AGAR AAP STAGE SHOW KARTE HAI TO KABHI STAGE CONDUCT KARNE MUJHE BULAIYE,AAP SE MILNE KEE ICHA HAI

pRADEEP
09425020970
RAIPUR

Blog Widget by LinkWithin