Tuesday, November 3, 2009

सचिन दा और मन्ना दा की जुगलबंदी - कव्वाली - किसनें चिलमन से मारा...


सचिन देव बर्मन एक ऐसा नाम है, जो हम जैसे सुरमई संगीत के दीवानों के दिल में अंदर तक जा बसा है. मेरा दावा है कि अगर आप और हम से यह पूछा जाये कि आप को सचिन दा के संगीतबद्ध किये गये गानों में किस मूड़ के, या किस Genre के गीत सबसे ज़्यादा पसंद है, तो आप कहेंगे, कि ऐसी को विधा नही होगी, या ऐसी कोई सिने संगीत की जगह नही होगी जिस में सचिन दा के मेलोड़ी भरे गाने नहीं हों.

आप उनकी किसी भी धुन को लें. शास्त्रीय, लोक गीत, पाश्चात्य संगीत की चाशनी में डूबे हुए गाने. ठहरी हुई या तेज़ चलन की बंदिशें. संवेदनशील मन में कुदेरे गये दर्द भरे नग्में, या हास्य की टाईमिंग लिये संवाद करते हुए हल्के फ़ुल्के फ़ुलझडी़यांनुमा गीत. जहां उनके समकालीन गुणी संगीतकारों नें अपने अपने धुनों की एक पहचान बना ली थी, सचिन दा हमेशा हर धुन में कोई ना कोई नवीनता देने के लिये पूरी मेहनत करते थे.उनकी हर धुन सिर्फ़ सुनाती ही नहीं थी, मगर उस भाव को दर्शाती थी. याने आप सिर्फ़ धुन सुन कर उस गीत के परिदृश्य का इंतेखाब कर सकते हैं आसानी से.


उनके बारे में सही ही कहा है, देव आनंद नें (जिन्होने अपने लगभग हर फ़िल्म में - बाज़ी से प्रेम पुजारी तक सचिन दा का ही संगीत लिया था)- He was One of the Most Cultured & and Sophisticated Music Director,I have ever encountered !

किशोर कुमार को एक अलग अंदाज़ में गवाने का श्रेय भी दादा को ही जाता है. उन्होंनें देव आनंद के लिये किशोर कुमार की आवाज़ को जो प्रयोग किया वह इतिहास बन गया. बाद में राजेश खन्ना के लिये भी किशोर की आवाज़ लेकर किशोर को दूसरी इनिंग में नया जीवन दिया, जिसके बाद किशोर नें कभी भी पीछे मुड़ कर नही देखा.

उसके बावजूद, सचिन दा ने देव आनंद के लिये हमेशा ही किशोर से नहीं गवाया, बल्कि रफ़ी साहब से भी गवाया, जैसे जैसे भी गाने की ज़रूरत होती थी. तीन देवियां में - ऐसे तो ना देखो, और अरे यार मेरी तुम भी हो गज़ब, तेरे घर के सामने में तू कहां , ये बता और छोड़ दो आंचल ज़माना क्या कहेगा,गाईड़ में तेरे मेरे सपने और गाता रहे मेरा दिल, आदि.


अभी फ़िल्मी संगीत के आकाश पर विद्यमान एक महान , सर्वश्रेष्ठ गायक मन्ना डे साहब को दादासाहेब फ़ालके पुरस्कार से नवाज़ा गया. मन था कि उन पर भी कुछ लिखूं. मगर आज मन ये हो रहा है कि दिलीप के दिल से स्ट्रेट ड्राईव्ह मारूं और आपको आगे कुछ भी अधिक लिखने की बजाय, अपने एक खास कार्यक्रम - दिल का हाल सुने दिल वाला में से एक कव्वाली सुनाऊं, जिसे मन्ना दा नें अपने हरफ़न मौला स्वर में गाया है, और संगीत दिया है सचिन दा नें.
सचिन दा नें कव्वालीयां कम ही कंपोज़ की हैं, मगर यहां अपने आपमें कव्वाली और कोमेडी का बढियां ब्लेंडिंग किया है. बाकी रही बात मन्नादा के बारे में , तो हमारे हर दिल अज़ीज़ प्रसिद्ध उदघोषक , एंकर और मेरे अनुज मित्र श्री संजय पटेल से ही सुनें , जिनकी रसभरी वाणी में भी उनकी लेखनी की तरह सरस्वती का निवास है:


किसने चिलमन से मारा......

14 comments:

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर चर्चा ओर बहुत सुंदर गीत, काश आप असली गीत साथ मै लगाते तो सोने पर सुहागा होता.
धन्यवाद

Udan Tashtari said...

आनन्द आ गया दिलीप भाई..

किसने चिलमन से मारा......

संजय भाई का सुन्दर संचालन भी मन को भा गया.

अल्पना वर्मा said...

Sachin dev Burman जी के बारे mein kayee नयी baten आप की post से maluum huin.

-आप का gaaya गीत सुना--बहुत ही achcha gaaya है.लगा के जैसे original गीत सुन रहे हैं.
एक बहुत ही madhur गीत sunwane के लिए abhaar.

ताऊ रामपुरिया said...

वाह आनंद आगया जी, बहुत लाजवाब गीत. शुभकामनाएं.

रामराम.

डॉ .अनुराग said...

दिलीप जी आप लगता है गलत प्रोफेशन में आ गए हो ....

शरद कोकास said...

दिलीप भाई यह आलेख और यह चित्र बहुत सी पुरानी स्मृतियो को जगा गया ।

शरद कोकास said...

भाई गीत के बारे मे तो कहना ही भूल गया..लाजवाब । प्रस्तुतकर्ता महोदय कौन है उनका भी परिचय दीजिये ।

Old Monk said...

Dr. Anurag has diagnosed the "ailment" correctly.
This is yr real calling. You have god's gift and blessings, passion and excellence in the field of music.
It is never "too late". Just focus on yr core competence. It won't be difficult for a person of yr calibre to make a grand success of it.
You have "spent" enough time listening to "sane" advice. Now just follow yr heart.
THE FORCE IS WITH YOU.

दिलीप कवठेकर said...
This comment has been removed by the author.
Manish Kumar said...

aapki gayiki ke to qayal pahle se hi hain. Waise aap se anurodh hai ki video ke sath sath audio bhi alag se de diya karein. You tube ki buffering kabhi itna wait karati hai ki gane ka lutf jata rahta hai.

'अदा' said...

Dilip Ji,
aapka gaya hua geet suna 'kisne chilman se maara nazara mujhe'
bahut bahut bahut hi sundar laga sunkar..
badhai..

अर्शिया said...

बहुत ही लाजवाब प्रस्तुति है। शुक्रिया इस प्रस्तुति हम तक पहुंचाने के लिए।


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क्या है कोई पहेली को बूझने वाला?
पढ़े-लिखे भी होते हैं अंधविश्वास का शिकार।

HAREKRISHNAJI said...

दिलिपजी,

आपका इस ब्लॉगविश्व पे परिचय होना मेरे लिये एक खुशी की बात है. मैने मेरे जिवन का सबसे अच्छा समय इन्दोर मे बिताया है जो मै कभी भुला ना पावुंगा

mastkalandr said...

Shukriya mitra..kafi samay baad yad kiya.
thanks for comment and visiting my blog Suman Kalyanpur Nightingale of India ...
she has got reward for her work after a considerable time period khair ... der aayad durust aayad, koi bat nahi unhe sangeet premiyon ka athah pyaar mila ,jo mohabbat mili ,adar mila uski barabri koi award nahi kar sakta .

Recently in Jan 2010 she has been awarded with prestigious Lata Mangeshkar Award by Government of Maharashtra.
As a tribute suman kalyanpur ji ka ak video kal mein youtube par upload kiya hai ,aapko pasand aayega dekhiyega ..


http://www.youtube.com/watch?v=wPdHlPzfJe0

http://www.youtube.com/mastkalandr

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